DAV Class 8 Hindi Chapter 1 Question Answer – Gyan Sagar

पाठ 1 “हम पंछी उन्मुक्त गगन के” का एक सुंदर और सरल परिचय (Intro) नीचे दिया गया है। इसे आप अपनी उत्तर-पुस्तिका (Notebook) की शुरुआत में या परीक्षा में संदर्भ के रूप में लिख सकते हैं:

पाठ परिचय (Introduction)

“हम पंछी उन्मुक्त गगन के” प्रसिद्ध कवि डॉ. शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ द्वारा रचित एक अत्यंत मर्मस्पर्शी और प्रेरणादायक कविता है। इस कविता के माध्यम से कवि ने हर जीव के जीवन में ‘स्वतंत्रता’ (आज़ादी) के महत्व को रेखांकित किया है।

मुख्य बिंदु:

  • विषय-वस्तु: कविता में पक्षियों के माध्यम से गुलामी के दर्द और आज़ादी की तड़प को दर्शाया गया है।
  • मूल भाव: पक्षी मनुष्यों से प्रार्थना करते हैं कि उन्हें सोने के पिंजरे में बंद न किया जाए। उनके लिए सोने की कटोरी में मिलने वाले छप्पन भोग से कहीं बेहतर खुले आकाश में उड़ना और नीम की कड़वी निबौरी खाना है।
  • सन्देश: यह कविता हमें यह संदेश देती है कि पराधीनता (गुलामी) में मिलने वाले तमाम सुख-सुविधा और वैभव भी आज़ादी के खुले आसमान और संघर्ष से बढ़कर नहीं हो सकते। स्वतंत्रता सभी का जन्मसिद्ध अधिकार है।

सुझाव: यदि आप अपनी कॉपी में यह चैप्टर शुरू कर रहे हैं, तो इस परिचय के साथ एक छोटा सा पेड़ या उड़ते हुए पक्षी का चित्र (Drawing) भी बना सकते हैं, जिससे आपकी नोटबुक बहुत आकर्षक लगेगी।

DAV Class 8 Hindi Chapter 1 Question Answer

डी.ए.वी. (DAV) कक्षा 8 की हिंदी पाठ्यपुस्तक ‘ज्ञान सागर’ के पाठ 1 “हम पंछी उन्मुक्त गगन के” (कविता – शिवमंगल सिंह ‘सुमन’) के अभ्यास के मुख्य प्रश्न-उत्तर नीचे दिए गए हैं:

अभ्यास के प्रश्न-उत्तर (कविता में से)

प्रश्न 1: किस कारण पक्षियों के पंख टूट जाएँगे?

उत्तर: पक्षियों के पंख पिंजरे की सोने की तीलियों (सलाखों) से टकराकर टूट जाएँगे, क्योंकि वे स्वतंत्र होकर उड़ने के लिए व्याकुल रहते हैं और जब वे पिंजरे से बाहर निकलने का प्रयास करेंगे, तो उनके कोमल पंख सलाखों से टकराएँगे।

प्रश्न 2: पिंजरे में बंद रहकर मिलने वाले खाने व पानी की जगह पक्षियों को क्या पसंद है और क्यों?

उत्तर: पिंजरे में बंद रहकर सोने की कटोरी में मिलने वाले मैदा-पानी की जगह पक्षियों को कड़वी निबौरी (नीम का फल) और नदी-झरनों का बहता हुआ पानी पीना पसंद है। ऐसा इसलिए है क्योंकि उन्हें गुलामी के सुख-सुविधाओं से कहीं अधिक अपनी आज़ादी प्यारी है।

प्रश्न 3: पक्षियों के क्या अरमान हैं?

उत्तर: पक्षियों के अरमान हैं कि वे नील गगन की सीमा को पाने के लिए दूर तक उड़ें और आकाश के तारों रूपी अनार के दानों को चुगें। वे स्वतंत्र होकर पेड़ों की सबसे ऊँची टहनी पर झूला झूलना चाहते हैं।

प्रश्न 4: भावार्थ स्पष्ट कीजिए—

“लेकिन पंख दिए हैं, तो

आकुल उड़ान में विघ्न न डालो।”

उत्तर: इन पंक्तियों का भाव यह है कि ईश्वर ने यदि पक्षियों को उड़ने के लिए पंख दिए हैं, तो इंसानों को अपनी खुशी या स्वार्थ के लिए उन्हें पिंजरे में कैद नहीं करना चाहिए। उनकी स्वाभाविक और बेचैन उड़ान में किसी भी प्रकार की बाधा या रुकावट नहीं डालनी चाहिए।


उचित उत्तर पर सही ($\checkmark$) का निशान लगाइए

(क) पक्षी कहाँ गा नहीं पाएँगे?

  • घोंसले में
  • पिंजरे में ($\checkmark$)
  • आकाश में
  • पेड़ों में

(ख) स्वर्ण-श्रृंखला के बंधन में पक्षी क्या भूल गए हैं?

  • पढ़ना
  • नहाना
  • उड़ना ($\checkmark$)
  • सोना

(ग) पक्षियों का क्या सपना है?

  • तरु की फुनगी पर झूलने का / स्वच्छंद रहने का
  • पिंजरे में रहने का
  • घोंसले पर रहने का
  • महल में रहने का

6. कविता की पंक्तियाँ पूरी कीजिए-

उत्तर:

(क) बस सपनों में देख रहे हैं

तरु की फुनगी पर झूले ।

(ख) या तो क्षितिज मिलन बन जाता

या तनती साँसों की डोरी।


बातचीत के लिए

1. ‘कटुक निवौरी’ और ‘कनक कटोरी’ के द्वारा किस ओर संकेत किया गया है?

उत्तर: ‘कटुक निबौरी’ और ‘कनक कटोरी’ द्वारा कवि स्वतंत्रता के महत्त्व की ओर संकेत करते हैं। कवि का मानना है कि स्वतंत्र रहने पर नीम का कड़वा फल भी हमारे लिए छप्पन भोग से कम नहीं होता और पराधीन रहने पर सोने की कटोरी में मिलने वाला भोजन भी हमारे लिए बेस्वाद होता है।

2. हमें पक्षियों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए। चर्चा कीजिए।

उत्तर: हमें पक्षियों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए क्योंकि ये उड़ने-फिरने वाले पक्षी ईश्वर के चमत्कार हैं। इनकी ध्वनियों की वजह से ही सुबह मधुर लगती है और संध्या आकर्षक । वास्तव में ये नभ के जीवंत सौंदर्य हैं।

3. पक्षियों की और हमारी दिनचर्या में क्या अंतर है?

उत्तर: पक्षियों और हमारी दिनचर्या में आका-जमीन का अंतर होता है। पक्षी सूरज के उगने से पहले ही उठकर अपनी मीठी ध्वनियों से हमें उठाते हैं। भोजन की तलाश में आकाश में विचरण करते हैं और संध्या होते ही पुनः अपने-अपने घोंसले में लौट आते हैं, जबकि हमारी दिनचर्या प्राकृतिक न होकर कृत्रिम (मानव निर्मित) होती है।


अनुमान और कल्पना

1. कल्पना कीजिए कि आप एक पक्षी हैं जिसे पिंजरे में बंद कर दिया गया है। आप उसमें से बाहर निकलने के लिए क्या प्रयास करेंगे?

उत्तर: अगर मैं पिंजरे में बंद पक्षी होता तो अपनी पूरी शक्ति स्वतंत्र होने में व्यय कर देता और उस समय तक हार नहीं मानता जब तक मैं स्वतंत्र नहीं हो जाता या मेरे प्राण नहीं निकल जाते।

2. यदि आप पंछी बनकर खुले गगन में घूमते हैं तो आपको धरती का नजारा कैसा लगेगा?

उत्तर: यदि मैं पंछी बनकर खुले गगन में घूमता तो वह पल मेरे लिए हृदय-स्पर्शी होता और पृथ्वी का नजारा मेरे लिए शिखर से आधार की ओर देखने वाला होता जो सचमुच अपने-आपमें अनूठा होता।

3. अगर कबूतर ने आपके घर के किसी कोने में घोंसला बनाकर उसमें अंडा दे दिया तो आप उसकी देखभाल कैसे करेंगे?

उत्तर: अगर कबूतर ने मेरे घर के किसी कोने में घोंसला बनाकर उसमें अंडा दे दिया है तो मैं उसे अच्छी तरह से ख्याल रखूँगा कि उस जगह कोई साँप, बिल्ली या चूहा न आ सके।


भाषा की बात

उत्तर:

1. क. पुलकित – पंख

ख. उन्मुक्त – गगन

ग. कनक – कटोरी

घ. कटुक – निबौरी

2. उड़ान, चुगते, जाएँगे, डालो, दिए, देख, पाएँगे, बन, बहता, भूले

3. क. पक्षी – चिड़िया, खग

ख. नभ – गगन, आकाश

ग. पेड़ – तरु, वृक्ष

जीवन मूल्य

‘हम पंछी उनमुक्त गगन के

पिंजरबद्ध न गा पाएँगे

1. पक्षियों को पिंजरे में बंद करना उनकी आजादी छीनना है? कैसे?

उत्तर: पक्षियों को पिंजरे में बंद करना उनकी आज़ादी छीनना है क्योंकि भगवान ने उन्हें पंख खुले आकाश में उड़ने के लिए दिए हैं न की अपने स्वार्थ के लिए पिंजरे में कैद करके रखने केलिए | ऐसा करना उनकी आजादी पर प्रतिबंध लगाने जैसा है।

2. हमें किसी की भी स्वतंत्रता क्यों नहीं छीननी चाहिए?

उत्तर: स्वतंत्रता सभी का जन्मसिद्ध अधिकार है। हमें किसी की भी स्वतंत्रता नहीं छीननी चाहिए । ईश्वर ने सभी को स्वतंत्र रहने और अपनी रक्षा करने के लिए कुछ न कुछ दे रखा है तो हमें उस ईश्वर के बनाए नियमों का उल्लंघन कदापि नहीं करना चाहिए।

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